वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Wednesday, 5 September 2018

दर्द में भी मुस्कुराने की आदत डाल दी

दर्द में भी मुस्कुराने की आदत डाल दी
मुझमें अपने हिस्से की शराफत डाल दी

आवारगी में भटकता रहा गैरों की तरह
आ के आगोश में सहेजा अपनों की तरह
जब करवटें बदलते बीतने लगीं रातें
सुनहरे सपनों की सुहानी चादर डाल दी

रपटीली राहों पे भी फिसलने न दिया
पत्थरों के बीच जीने का हुनर भी दिया
जब कभी कहीं लड़खड़ाए मेरे कदम
मेरे कानों में संभलने की सीख डाल दी

तनहाइयों की बातें बस कहानियों में रहीं
साथ चलने की कसमें सच्चाइयों में रहीं
जब जमाने ने किया हर ओर से किनारा
सच्ची बातों ने सहारे की ताकत डाल दी

दर्द में भी मुस्कुराने की आदत डाल दी
मुझमें अपने हिस्से की शराफत डाल दी

Thursday, 12 April 2018

दुनिया ये बेगानी है

ख्वाबों की खिड़की से उसकी परछाई झांकी है
आंख खुली तो गुमसुम सी सच्चाई मैंने आंकी है
जब देखा बस पाया मैंने लगी मौन टकटकी है
मैं उसमें और वो मुझमें बात ये बिल्कुल पक्की है


मेरे हर यकीन में उसका एहसास मुकम्मल है
उन गुपचुप आंखों का सच ही मेरा प्रतिफल है
हर क्षण उसके मन में बहती नदिया कलकल है
पास गया जो पाया मैंने वह तो पावन गंगाजल है

आंखों से अश्कों तक बस तेरी-मेरी कहानी है
मेरी-तेरी हर बात बड़ी बाकी सब बचकानी है

तेरा आना मेरा हो जाना बात ये मैंने जानी है
हम-तुम ही हैं अब सबकुछ दुनिया ये बेगानी है

Tuesday, 3 April 2018

सच्चे अपने किस्से हैं

ये अदा है तेरी या बेरुखी, 
मुश्किल है जरा समझना
ये याद है तेरी या हिचकी, 
दिल खोलके सच कहना

मेरे कानों में घुल रही हैं, 
तेरी मीठी सी रुसवाइयां
दिल पे दस्तक दे रही हैं, 
तेरी खामोश सच्चाइयां

मेरे तसव्वुर में तुम हो, 
बस यही है बतलाना
तेरी ख्वाहिशें हैं मेरी,
इतना सा है समझाना

तेरी वफा का तलबगार हूं,
ये बताने की है मशक्कत
मेरा वजूद तुमसे ही है,

उसे पाने की है बस चाहत

तुम हो तो ही मैं भी हूं, 
सब अफसाने तुमसे हैं
बार-बार यह कहता हूं,
सच्चे अपने सब किस्से हैं





Monday, 18 May 2015

इतना मगरूर नहीं हूं

एहसानों की फेहरिश्त में
कई दर्द छुपाए हुए हूं
मैं कुछ भी हो जाऊं
वादाफरामोश नहीं हूं

दूरियों के इस दर्द में
पूरी तरह मशगूल हूं
तुम ने जैसा समझा 
वैसा बिल्कुल नहीं हूं

तुझसे दूर जाने को
थोड़ा सा मजबूर हूं
सब कुछ भुला दूं मैं
इतना मगरूर नहीं हूं

Saturday, 4 October 2014

अबकी मेला बड़ा कठिन था

अबकी मेला बड़ा कठिन था
भीड़ बहुत थी शोर बहुत था
रावण सारे बहुत बड़े थे
राम कहीं बस छिपे खड़े थे

लीला करना पड़ा जटिल था
तीर राम का गुमसुम सा था
रावण वध की आई बारी
नेता ने वह बाजी मारी

तीर चलाना राम को जो था
वह भी नेता ने छीना था
रावण को रावण ने मारा
मौन रह गया मेला सारा

Saturday, 19 July 2014

हम गुमसुम से लगते हैं

अबकी बारी यह सावन
बेहद सूना-सूना है
तुम तो हो वैसी ही
हम गुमसुम से लगते हैं

झूले के बिन बरगद
बिल्कुल खाली सा है
काले मेघ बिना बारिश के
बेमतलब से लगते हैं

कपटी कागा बोल रहा
कोयल पर उसका कब्जा है
गरज-घुमड़ कर जाते बादल
बेमानी से लगते हैं

फूलों के खेतों पर
छाया घना कुहासा है
हरे-भरे ये वन उपवन
नकली जैसे लगते हैं

Friday, 16 May 2014

पग-पग वीरानी छायी है

प्रेम तुम्हारा कठिन सफ़र सा
नहीं मिल रहा कोई ठौर
मुझको ठुकराने से पहले  
कसम प्यार की खायी है 

वादों की देहरी पर बैठा 
ढूंढ रहा तुमको चहुँओर 
हमने तो बस तुममें ही
खुद की आहट पायी है

तुम तो चले गए बस यूं ही 
कैसे बढ़े ये जीवन डोर 
तुम बिन मैं कुछ भी नहीं 
पग-पग वीरानी छायी है