वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Sunday, 27 October 2013

मेरा यह मौन

मेरा यह मौन 
तुम्हारे मौन से छोटा है
कहीं लगता सच 
कहीं यह मुखौटा है 

मैंने कहा था 
मान जाओ इस बार भी 
हमेशा की तरह
जीत जाओ इस बार भी 

पर तुम्हें तो 
मुझे जिताने की जिद थी  
हार कर भी 
जीत जाने की हद थी 

अब क्या करूँ मैं
जीतने की आदत नहीं है 
तुमसे जीत कर 
जश्न की ताकत नहीं हैं 

Saturday, 13 April 2013

आओ सुख ढूंढ़े

जलते अंगारों में
उठते शोलों में
कुछ पीली सी लपटों में
आओ सुख ढूंढ़ें

टूटे सपनों में
ढहती इच्छाओं में
और दरकते अरमानों में
आओ सुख ढूंढ़ें

अपने लोगों में
पहचाने बोलों में
धोखे के अंबारों में
आओ सुख ढूंढ़ें

Wednesday, 13 February 2013

ये बात न तुमने जानी है


 तुम्हारे करीब आकर
दूरियों का पता चला
साथ रहकर तमाम दिन
तनहाइयों का पता चला

अकेले मेरा वजूद ही नहीं कुछ
सच के पास गया तो जाना
तुम बिन अधूरा हूँ मैं बिल्कुल
परछाई गुम हुई तो माना

सच कहता हूँ आज कसम से
तुम बिन जीना बेमानी है
कैसे कटती है रात मेरी
ये बात न तुमने जानी है