तुम्हारे करीब आकर
दूरियों का पता चला
साथ रहकर तमाम दिन
तनहाइयों का पता चला
अकेले मेरा वजूद ही नहीं कुछ
सच के पास गया तो जाना
तुम बिन अधूरा हूँ मैं बिल्कुल
परछाई गुम हुई तो माना
सच कहता हूँ आज कसम से
तुम बिन जीना बेमानी है
कैसे कटती है रात मेरी
ये बात न तुमने जानी है