अबकी मेला बड़ा
कठिन था
भीड़ बहुत थी शोर
बहुत था
रावण सारे बहुत
बड़े थे
राम कहीं बस छिपे
खड़े थे
लीला करना पड़ा
जटिल था
तीर राम का
गुमसुम सा था
रावण वध की आई
बारी
नेता ने वह बाजी
मारी
तीर चलाना राम को
जो था
वह भी नेता ने
छीना था
रावण को रावण ने
मारा
मौन रह गया मेला
सारा
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