वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Thursday, 22 November 2012

पापा जल्दी आ जाओ

पापा जल्दी आ जाओ
भैया बहुत सताता है
बेमतलब की बातें कर
अक्सर मुझे डराता है

झूठ-मूठ ही उसकी बातें
मुझको डांट खिलाती हैं 
दादी माँ भी यूँ ही
उसके झांसे में आती हैं

सच्ची पापा तुम बिन अब
कुछ भी ठीक नहीं लगता
माँ से लोरी सुनना भी
मुझको खास नहीं भाता

रात अचानक सोते-सोते
नींद मेरी खुल जाती है
सपनों में भी अब केवल
तस्वीर तुम्हारी दिखती है

Saturday, 17 November 2012

...या सब फ़साना ही था

तुमसे दूरी हो रही मुश्किल
पास आने की इजाजत ही नहीं
मुझे याद क्यों किया तुमने
जब बेदर्दी से भुलाना ही था

तुम्हारी यादों के समंदर में
ये लहरें बेतरतीब सी हैं
वायदों को कहा सच क्यूँ था
जब उन्हें झुठलाना ही था

मेरी नासमझी का सबब
तेरी समझदारी में छिपा
कोई रिश्ता भी था मुझसे
या बस बहाना ही था

आज बता ही दो तुम
मुझसे नजदीकियों में
हकीकत भी थी कुछ
या सब फ़साना ही था

Thursday, 8 November 2012

ये खुशियाँ महँगी क्यों हैं?

कुछ खुशियाँ छोटी होती हैं
पर कीमत होती बहुत बड़ी
कोई तो बतलाये मुझको
ये खुशियाँ महँगी क्यों हैं?

छोटी खुशियों की खातिर 
कीमत की परवाह न की
अब जवाब भी दे दे कोई 
खुशियों की कीमत क्यों है?

सच कहता हूँ आज सुनो
अब न सूझता कुछ भी है 
कोई सुझाए आकर मुझको 
खुशियाँ देखूं या कीमत छोडूं?