तेरे जाने की आहट से
यूं लगा कि जैसे शाम ढली
पर पता नहीं चल पाया मुझे
अब सूरज निकलेगा नहीं
तुम बोले थे हंसकर मुझसे
आओगे फिर पास मेरे
पर पता नहीं चल पाया मुझे
हंसी तेरी अब और नहीं
तुम तो मेरी परछाई हो
यही हमेशा माना मैने
पर पता नहीं चल पाया मुझे
अब मैं खुद भी बचा नहीं