वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Saturday, 19 July 2014

हम गुमसुम से लगते हैं

अबकी बारी यह सावन
बेहद सूना-सूना है
तुम तो हो वैसी ही
हम गुमसुम से लगते हैं

झूले के बिन बरगद
बिल्कुल खाली सा है
काले मेघ बिना बारिश के
बेमतलब से लगते हैं

कपटी कागा बोल रहा
कोयल पर उसका कब्जा है
गरज-घुमड़ कर जाते बादल
बेमानी से लगते हैं

फूलों के खेतों पर
छाया घना कुहासा है
हरे-भरे ये वन उपवन
नकली जैसे लगते हैं

1 comment:

  1. Neeraj yaad aa gaye....

    Abki sawan me shararat mere saath hui
    mera ghar chhor ke kul shahar men barsaat hui

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