दर्द में भी मुस्कुराने की आदत डाल दी
आवारगी में भटकता रहा गैरों की तरह
आ के आगोश में सहेजा अपनों की तरह
जब करवटें बदलते बीतने लगीं रातें
सुनहरे सपनों की सुहानी चादर डाल दी
रपटीली राहों पे भी फिसलने न दिया
पत्थरों के बीच जीने का हुनर भी दिया
जब कभी कहीं लड़खड़ाए मेरे कदम
मेरे कानों में संभलने की सीख डाल दी
तनहाइयों की बातें बस कहानियों में रहीं
साथ चलने की कसमें सच्चाइयों में रहीं
जब जमाने ने किया हर ओर से किनारा
सच्ची बातों ने सहारे की ताकत डाल दी
दर्द में भी मुस्कुराने की आदत डाल दी
मुझमें अपने हिस्से की शराफत डाल दी
मुझमें अपने हिस्से की शराफत डाल दी
आवारगी में भटकता रहा गैरों की तरह
आ के आगोश में सहेजा अपनों की तरह
जब करवटें बदलते बीतने लगीं रातें
सुनहरे सपनों की सुहानी चादर डाल दी
रपटीली राहों पे भी फिसलने न दिया
पत्थरों के बीच जीने का हुनर भी दिया
जब कभी कहीं लड़खड़ाए मेरे कदम
मेरे कानों में संभलने की सीख डाल दी
तनहाइयों की बातें बस कहानियों में रहीं
साथ चलने की कसमें सच्चाइयों में रहीं
जब जमाने ने किया हर ओर से किनारा
सच्ची बातों ने सहारे की ताकत डाल दी
दर्द में भी मुस्कुराने की आदत डाल दी
मुझमें अपने हिस्से की शराफत डाल दी
No comments:
Post a Comment