वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Wednesday, 5 September 2018

दर्द में भी मुस्कुराने की आदत डाल दी

दर्द में भी मुस्कुराने की आदत डाल दी
मुझमें अपने हिस्से की शराफत डाल दी

आवारगी में भटकता रहा गैरों की तरह
आ के आगोश में सहेजा अपनों की तरह
जब करवटें बदलते बीतने लगीं रातें
सुनहरे सपनों की सुहानी चादर डाल दी

रपटीली राहों पे भी फिसलने न दिया
पत्थरों के बीच जीने का हुनर भी दिया
जब कभी कहीं लड़खड़ाए मेरे कदम
मेरे कानों में संभलने की सीख डाल दी

तनहाइयों की बातें बस कहानियों में रहीं
साथ चलने की कसमें सच्चाइयों में रहीं
जब जमाने ने किया हर ओर से किनारा
सच्ची बातों ने सहारे की ताकत डाल दी

दर्द में भी मुस्कुराने की आदत डाल दी
मुझमें अपने हिस्से की शराफत डाल दी