अबकी बारी यह सावन
बेहद सूना-सूना है
तुम तो हो वैसी ही
हम गुमसुम से लगते हैं
झूले के बिन बरगद
बिल्कुल खाली सा है
काले मेघ बिना बारिश के
बेमतलब से लगते हैं
कपटी कागा बोल रहा
कोयल पर उसका कब्जा है
गरज-घुमड़ कर जाते बादल
बेमानी से लगते हैं
फूलों के खेतों पर
छाया घना कुहासा है
हरे-भरे ये वन उपवन
नकली जैसे लगते हैं
बेहद सूना-सूना है
तुम तो हो वैसी ही
हम गुमसुम से लगते हैं
झूले के बिन बरगद
बिल्कुल खाली सा है
काले मेघ बिना बारिश के
बेमतलब से लगते हैं
कपटी कागा बोल रहा
कोयल पर उसका कब्जा है
गरज-घुमड़ कर जाते बादल
बेमानी से लगते हैं
फूलों के खेतों पर
छाया घना कुहासा है
हरे-भरे ये वन उपवन
नकली जैसे लगते हैं
Neeraj yaad aa gaye....
ReplyDeleteAbki sawan me shararat mere saath hui
mera ghar chhor ke kul shahar men barsaat hui