वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Tuesday, 13 May 2014

कुछ तो है तुम में

कुछ तो है 
तुम में 
सबसे अलग 
सबसे ख़ास

सच कहता हूँ
तुम बिन
कुछ भी नहीं
जगत में 

सब कुछ
सूना-सूना है
बिलकुल ही
रीता-रीता है 

मुझे पता है
तुम्हें नहीं
परवाह मेरी
बिल्कुल भी 

फिर भी
ना जाने क्यों
मैंने बांधी
उम्मीदें तुमसे 

जाओ अब तुम
जी लूँगा मैं भी
टूटी उम्मीदों
बिखरे सपनों संग 

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