वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Thursday, 17 April 2014

आओ तुम्हें ले चलूँ

आओ तुम्हें ले चलूँ 
दूर कहीं 
पहाड़ों के पार 
जहाँ बस हम हों 
और हो तुम्हारी हँसी 

खुले बालों से कर सकूँ 
बादलों को महसूस 
और फिर हर सुबह 
कुछ टपकती बूँदें 
कराएं बारिश का एहसास 

तुम हंसो तो लगे 
बस अभी आया है सूरज 
बादलों को चीरकर 
मुझे तुमसे मिलाने 
सबको अकेला छोड़कर 

पर यह क्या
तुम तो जा रही हो 
अपने सब वादे तोड़कर 
बादल, बूँदें, बारिश, सूरज 
सबको यूँ ही छलकर  

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