आओ तुम्हें ले चलूँ
दूर कहीं
पहाड़ों के पार
खुले बालों से कर सकूँ
तुम हंसो तो लगे
बस अभी आया है सूरज
बादलों को चीरकर
मुझे तुमसे मिलाने
सबको अकेला छोड़कर
पर यह क्या
तुम तो जा रही हो
अपने सब वादे तोड़कर
बादल, बूँदें, बारिश, सूरज
सबको यूँ ही छलकर
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