वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Saturday, 22 March 2014

तेरे जाने की आहट से


तेरे जाने की आहट से
यूं लगा कि जैसे शाम ढली
पर पता नहीं चल पाया मुझे
अब सूरज निकलेगा नहीं

तुम बोले थे हंसकर मुझसे
आओगे फिर पास मेरे
पर पता नहीं चल पाया मुझे
हंसी तेरी अब और नहीं

तुम तो मेरी परछाई हो
यही हमेशा माना मैने
पर पता नहीं चल पाया मुझे
अब मैं खुद भी बचा नहीं

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