आज तुम्हारे लिए लिखूं कुछ
जो भी हो बस तुम जैसा
सीधा-सादा भोला-भाला
कुछ ज्यादा ही अपना सा
तेरा आना फिर छा जाना
कुछ वैसा लिखना चाहूँ
यादों की परछाईं गहरी
उसे मूर्त करना चाहूँ
तुम ही बस तुम ही तो हो
मेरे सपनों का अनावरण
तुमने मेरे जीवन में आकर
हटा दिए अंतस के आवरण
जो भी हो बस तुम जैसा
सीधा-सादा भोला-भाला
कुछ ज्यादा ही अपना सा
तेरा आना फिर छा जाना
कुछ वैसा लिखना चाहूँ
यादों की परछाईं गहरी
उसे मूर्त करना चाहूँ
तुम ही बस तुम ही तो हो
मेरे सपनों का अनावरण
तुमने मेरे जीवन में आकर
हटा दिए अंतस के आवरण
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