वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Tuesday, 11 February 2014

आज तुम्हारे लिए लिखूं कुछ

आज तुम्हारे लिए लिखूं कुछ
जो भी हो बस तुम जैसा
सीधा-सादा भोला-भाला
कुछ ज्यादा ही अपना सा

तेरा आना फिर छा जाना
कुछ वैसा लिखना चाहूँ
यादों की परछाईं गहरी
उसे मूर्त करना चाहूँ

तुम ही बस तुम ही तो हो
मेरे सपनों का अनावरण
तुमने मेरे जीवन में आकर
हटा दिए अंतस के आवरण

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