वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Sunday, 27 October 2013

मेरा यह मौन

मेरा यह मौन 
तुम्हारे मौन से छोटा है
कहीं लगता सच 
कहीं यह मुखौटा है 

मैंने कहा था 
मान जाओ इस बार भी 
हमेशा की तरह
जीत जाओ इस बार भी 

पर तुम्हें तो 
मुझे जिताने की जिद थी  
हार कर भी 
जीत जाने की हद थी 

अब क्या करूँ मैं
जीतने की आदत नहीं है 
तुमसे जीत कर 
जश्न की ताकत नहीं हैं 

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