वीराने पथ पर, अनुशासन की राह सजाये, निकला यह दीवाना था, मिला नहीं कुछ भी ऐसा, जो बातों से आगे जाये, सो सोचा, बातों ही बातों को, बातों से जोड़ा जाये, ब्लॉगिंग देखी, ब्लॉगिंग समझी, टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ... ... और बन गया let's talk
Saturday, 13 April 2013
आओ सुख ढूंढ़े
जलते अंगारों में उठते शोलों में कुछ पीली सी लपटों में आओ सुख ढूंढ़ें
टूटे सपनों में ढहती इच्छाओं में और दरकते अरमानों में आओ सुख ढूंढ़ें
अपने लोगों में पहचाने बोलों में धोखे के अंबारों में आओ सुख ढूंढ़ें
its all mind game......sukh dhoondna ni padta u will get it if u want
ReplyDeletedo you know anyone who doesn't want..
Deleteexplain u later
Deleteरूठे रिश्तों से,
ReplyDeleteछुटे मित्रों से
झूठे किस्सों से
ऊपर निकलें
फिर से जुड़ लें
... आओ सुख ढूंढें
बहुत सुन्दर... "आओ सुख ढूंढें", शब्दों के सागर से मोती ढूंढ लाये हो दोस्त
nice poem sir ji
ReplyDelete