बस इत्तफाक तो नहीं
एक संघर्ष का प्लेटफार्म हैजहां मिलते हैं
तमाम जाने-अनजाने लोग
एक बड़े सफर पर जाने के लिए
उनमें से कुछ
बन जाते हैं हमसफर
इन हमसफरों में भी कुछ
होते हैं बेवफा
जो किसी न किसी स्टेशन पर
छोड़ जाते हैं साथ
सबसे कठिन है
उन्हें पहचानना
जो बीच में ही चल देंगे
हमें सोता समझ कर
इस सफर में
हमें ढूंढ़ने होते हैं
कुछ सच्चे कुछ अपने
जो साथ चलें हर कदम पर
और कहें
नहीं है घबराने की कोई वजह
अंधेरे भरे हर मोड़ पर
उनका उजाला जो है
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