वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Saturday, 15 December 2012

...तो मैं क्या करूं

जिंदा रहने को
जरूरी है जिंदगी
गर वही रूठ जाए
तो मैं क्या करूं

वो कहते हैं मुझसे
मना लो जिंदगी को
ठीक हो जाएंगे
हाल दिल के सभी

कोई उनको बताये
हालातों का सच
कठिन है बहुत
जिंदगी की डगर

वो जिसमें छुपी
है मेरी जिंदगी
दूर मुझसे बहुत
हो गया वो सफ़र

इतना आसां होता
मनाना जिंदगी को
रूठने न देता कभी
मैं उसे इस तरह

2 comments:

  1. जिन्दगी तुझको मनाने निकले
    हम भी किस दर्जा-ए-दीवाने निकले
    कुछ तो मुखालिफ थे मेरे अपने
    कुछ मेरे दोस्त पुराने निकले....!

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