जिंदा रहने को
जरूरी है जिंदगी
गर वही रूठ जाए
तो मैं क्या करूं
वो कहते हैं मुझसे
मना लो जिंदगी को
ठीक हो जाएंगे
हाल दिल के सभी
कोई उनको बताये
हालातों का सच
कठिन है बहुत
जिंदगी की डगर
वो जिसमें छुपी
है मेरी जिंदगी
दूर मुझसे बहुत
हो गया वो सफ़र
इतना आसां होता
मनाना जिंदगी को
रूठने न देता कभी
मैं उसे इस तरह

जिन्दगी तुझको मनाने निकले
ReplyDeleteहम भी किस दर्जा-ए-दीवाने निकले
कुछ तो मुखालिफ थे मेरे अपने
कुछ मेरे दोस्त पुराने निकले....!
very nice Dhruv Bhai
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