तुमसे दूरी हो रही मुश्किल
पास आने की इजाजत ही नहीं
मुझे याद क्यों किया तुमने
जब बेदर्दी से भुलाना ही था
तुम्हारी यादों के समंदर में
ये लहरें बेतरतीब सी हैं
वायदों को कहा सच क्यूँ था
जब उन्हें झुठलाना ही था
मेरी नासमझी का सबब
तेरी समझदारी में छिपा
कोई रिश्ता भी था मुझसे
या बस बहाना ही था
आज बता ही दो तुम
मुझसे नजदीकियों में
हकीकत भी थी कुछ
या सब फ़साना ही था
पास आने की इजाजत ही नहीं
मुझे याद क्यों किया तुमने
जब बेदर्दी से भुलाना ही था
तुम्हारी यादों के समंदर में
ये लहरें बेतरतीब सी हैं
वायदों को कहा सच क्यूँ था
जब उन्हें झुठलाना ही था
मेरी नासमझी का सबब
तेरी समझदारी में छिपा
कोई रिश्ता भी था मुझसे
या बस बहाना ही था
आज बता ही दो तुम
मुझसे नजदीकियों में
हकीकत भी थी कुछ
या सब फ़साना ही था
मेरी नासमझी का सबब
ReplyDeleteतेरी समझदारी में छिपा
.....zabaardast kataaksh..
Aap to bahut achche kavi bhi hai, Sanjeev jee...
Thanks....
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