वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Thursday, 8 November 2012

ये खुशियाँ महँगी क्यों हैं?

कुछ खुशियाँ छोटी होती हैं
पर कीमत होती बहुत बड़ी
कोई तो बतलाये मुझको
ये खुशियाँ महँगी क्यों हैं?

छोटी खुशियों की खातिर 
कीमत की परवाह न की
अब जवाब भी दे दे कोई 
खुशियों की कीमत क्यों है?

सच कहता हूँ आज सुनो
अब न सूझता कुछ भी है 
कोई सुझाए आकर मुझको 
खुशियाँ देखूं या कीमत छोडूं?

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