वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Friday, 19 October 2012

क्या कहूं तुमसे


क्या कहूं तुमसे
अपना हमसफर
या फिर
यूं ही मिला कोई राह पर
समझना हो रहा मुश्किल

सच कहूं तुमसे
इस सफर में
दूर हूं
पर पास मेरे हो बहुत
तुम कर रहे व्याकुल

पूछ लूं तुमसे
वायदे थे ढेर भर
क्या हुए
सब गुम हुए पथ में
मन हो रहा विह्वल

बोल दूं तुमसे
उन वायदों संग
टूटे हैं
अरमानों के किले
थम सी गयी हलचल

1 comment:

  1. लग रहा है कि घर से दूर रहा नहीं जा रहा , वेदना परिलिक्षित हो रही है !

    प्रवीण

    ReplyDelete