वीराने पथ पर,
अनुशासन की राह सजाये,
निकला यह दीवाना था,
मिला नहीं कुछ भी ऐसा,
जो बातों से आगे जाये,
सो सोचा,
बातों ही बातों को,
बातों से जोड़ा जाये,
ब्लॉगिंग देखी,
ब्लॉगिंग समझी,
टॉकिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ...
... और बन गया
let's talk

Monday, 8 October 2012

दर्द..


हां, देखा है मैंने दर्द..
जब कोई अचानक पास आकर
हो जाता है दूर
तब होता है दर्द

जब
कोई बहुत खास होने का दावा कर
नहीं रह जाता है आम
तब होता है दर्द

जब
किसी के बहुत पास होकर भी
सताता है दूर होने का गम
तब होता है दर्द

1 comment:

  1. Wah Bhaiya, kalam ki dhar phir se paini ho rahi hai...

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